प्रत्यक्ष दादा भगवान की साक्षी में, वर्तमान में महाविदेह क्षेत्र में विचरते तीर्थंकर भगवान श्री सीमंधर स्वामी को अत्यंत भक्तिपूर्वक नमस्कार करता हूँ।
हे निरागी, निर्विकारी, सच्चिदानंद स्वरुप, सहजानंदी, अनंतज्ञानी, अनंतदर्शी, त्रैलोक्य प्रकाशक, प्रत्यक्ष-प्रकट ज्ञानी पुरुष श्री दादा भगवान की साक्षी में आपको अत्यंत भक्तिपूर्वक नमस्कार करके आपकी अनन्य शरण स्वीकार करता हूँ। हे प्रभु ! आपके चरणकमल में मुझे स्थान देकर अनंतकालिन भयंकर भटकन का अंत लाने की कृपा करें, कृपा करें।
हे विश्ववंध ऐसे प्रकट परमात्म स्वरुप प्रभु, आपका स्वरुप ही मेरा स्वरुप है पर अज्ञानतावश मुझे मेरा परमात्म स्वरुप समझ में नहीं आता, इसलिए आपके स्वरुप में मेरे स्वरुप का निरंतर दर्शन करूँ ऐसी मुझे परम शक्ति दे, शक्ति दे, शक्ति दे।
हे परमतारक देवाधिदेव ! संसार रुपी नाटक के आरंभकाल से आज के दिन की अधक्षण पर्यंत, किसी भी देहधारी जीवात्मा के मन-वचन-काया के प्रति जाने-अनजाने में जो अनंत दोष किये है, उन प्रत्येक दोष को देखकर, उसका प्रतिक्रमण करने की मुझे शक्ति दे। इन सभी दोषों का मैं आप से क्षमाप्रार्थी हूँ। आलोचना, प्रतिक्रमण, प्रत्याख्यान करता हूँ। हे प्रभु ! मुझे क्षमा करे, क्षमा करे, क्षमा करे और मुझसे फिर ऐसे दोष कभी भी न हो ऐसा द्रढ निर्धार करता हूँ। इसके लिए मुझे जागृति अर्पे; परम शक्ति दे, शक्ति दे, शक्ति दे।
अपने प्रत्येक पावन पदचिन्ह पर तीर्थकी स्थापना करनेवाले हे तीर्थंकर श्री सीमंधर स्वामी प्रभु ! संसार के सभी जीवों के प्रति संपूर्ण अविराधक भाव और सभी समकिती जीवों के प्रति संपूर्ण आराधक भाव से मेरे ह्यदय में सदा संस्थापित रहे, संस्थापित रहे, संस्थापित रहे। भूत, भविष्य और वर्तमान कालके सर्व क्षेत्रो के सर्व ज्ञानी भगवंतो को मेरे नमस्कार हो, नमस्कार हो, नमस्कार हो। हे प्रभु ! आप मुझ पर ऐसी कृपा बरसाइए कि जिससे मुझे इस भारतवर्षमें आपके प्रतिनिधि समान किसी ज्ञानी पुरुष का, सत् पुरुष का सत् समागम हो और उसका कृपाधिकारी बनकर आपके चरणकमल तक पहुँचने की पात्रता पाऊँ।
हे शासन देवी-देवता! हे पांचागुलि यक्षिणीदेवी तथा हे चांद्रायण यक्षदेव! हे श्री पद् मावती देवी! हमें श्री सीमंधर स्वामी के चरणकमल में स्थान पाने के मार्ग में कोई बाधा न आये, ऐसी अभूतपूर्व रक्षा देने की कृपा करे और केवलज्ञान स्वरुप में ही रहने की परम शक्ति दे, शक्ति दे, शक्ति दे।